*उच्च शिक्षा पाने बाद तरक्की को चुनी खेती की राह:वकालत के साथ दिग्विजय केले की खेती कर कमा रहे मोटा मुनाफा
*पोस्ट ग्रेजुएट अनिल केले की खेती कर तेजी से बढ़ रहे आगे
*युवाओं से सीख ले कृषक केले की खेती के ओर बढ़ाए कदम
धनघटा/संत कबीरनगर,मृत्युंजय शर्मा :कहते हैं ईमानदारी और लगन से किया गया कार्य कभी बेकार नहीं जाता।युवा केले की खेती कर अपने जीविका का साधन बनते हुए अपनी किस्मत चमकाने का काम कर रहे हैं।केला गोरखपुर बस्ती आजमगढ़ अंबेडकर नगर देवरिया तक के बाजारों में आपूर्ति भेजने का काम कर रहा है।
तहसील क्षेत्र के कटया में किसान परंपरागत खेती छोड़कर केले की खेती का अपना रास्ता प्रशस्त कर रहे हैं ।कटया के अनिल चौधरी के बाद 2018 में केले की खेती करने का कार्य शुरू किया एक एकड़ में उन्होंने केले की खेती का कार्य शुरू किया तो वह पीछे मुड़कर नहीं देखे।आज 5 एकड़ फसल लगाकर प्रगति करने का काम कर रहे हैं।कार्य के लिए पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने उन्हें सम्मानित भी किया।
उन्होंने बताया कि एमए बीएड करने के बाद जब कोई रास्ता नहीं दिखा तो वह खेती को अपना मूल व्यवसाय बना लिए ।
युवा दिग्विजय एलएलबी करने के बाद धनघटा तहसील में प्रैक्टिस करते हुए केले की खेती लगाकर अपने प्रगति करने का रास्ता खोलें ।रामसुंदर, लाल बहादुर ,पलकधारी ,देवानंद,सार्जन आदि केले की खेती के माध्यम से अपने प्रगति का रास्ता खोलें। केले की खेती करने वाले लोगों ने बताया कि एक एकड़ खेती केले की करने में उन्हें 80 से 85हजार की लागत आती है इसका पौधा महाराष्ट्र के जलगांव से मगाया जाता है।एक एकड़ में लगभग 3 से 3 लाख 50 हजार की आमदनी उनकी होती है ।उन्होंने बताया कि केले की खेती के माध्यम से घर बनवाने ट्रैक्टर खरीदने मोटरसाइकिल खरीदने के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई करवाने का काम वह कर रहे हैं। केले की फसल गोरखपुर के बेलघाट ,गोरखपुर, कलवारी, बस्ती,अंबेडकर नगर, अहिरौला, आजमगढ़ आदि स्थानों पर के व्यापारी यहां आकर केले को खरीदने का काम करते हैं प्रगति तेजी से हो रही। केले की खेती करने वाले लोगों ने बताया कि हम लोगों को सरकार की तरफ से ना तो कोई अनुदान मिला और ना ही केले के पौधों की व्यवस्था की गई।
उपजिलाधिकारी उत्कर्ष श्रीवास्तव ने बताया कि किसानों के प्रगति के लिए जो भी सहयोग की जरूरत होगी विभाग को पत्र लिखकर उनका सहयोग करवाने का काम किया जाएगा।