
औरैया,संवाददाता:विकास खंड अछल्दा की ग्राम पंचायत घसारा में 45 वां वार्षिक ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव प्राथमिक विद्यालय निकट मैदान में शनिवार से शुरू हुए रविवार को रामचरित मानस अखंड पाठ समापन बाद रात को मुनि आगमन, ताड़का वध की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों का अभिनय मंचन देख दर्शक भाव-विभोर हो गए।

चार दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व प्रधान प्रमोद शुक्ला और समाजसेवी रूपेश कुमार दुबे ने फीता काटकर करते हुए आरती उतार लीला की शुरुआत कराई।जिसमें महर्षि विश्वामित्र चक्रवर्ती नरेश राजा दशरथ से यज्ञ की रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण को मांगने उनके महल पहुंचे। महर्षि ने राजा दशरथ से कहा कि राजन ताड़का नाम की राक्षसी से पूरा समाज भयभीत है। वह जप तप यज्ञ इत्यादि नहीं करने देती है। इसलिए यज्ञ की रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण को लेने आया हूं। यह सुनते ही राजा दशरथ दुखी हो गए और कहा कि मुनिवर मेरे राम व लक्ष्मण बहुत कोमल व सुकुमार हैं, भला ताड़का जैसी राक्षसी का कैसे वध करेंगे?

ऋषिवर मैं स्वयं आपके यज्ञ की रक्षा के लिए चलूंगा, लेकिन राम व लक्ष्मण को नहीं जाने दूंगा। राजा दशरथ की बात सुन महर्षि विश्वामित्र क्रोधित हो गए और बोले कि मैं तुम्हारी अयोध्या नगरी को भस्म कर दूंगा। उसी समय वशिष्ठ मुनि आते हैं और विश्वामित्र को शांत कराते हुए राजा दशरथ को समझाते हैं कि राम लोक कल्याण के लिए अवतरित हुए हैं। इसलिए इनको महर्षि विश्वामित्र के साथ जाने दीजिए।राजा दशरथ राम व लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ विदा करते हैं।भगवान राम रास्ते मे ही ताड़का नाम की राक्षसी का वध करते हैं। ताड़का का वध करते ही रामलीला प्रांगण जय श्रीराम के नारे से गुंजायमान हो उठा।
कमेटी के छोटू दीक्षित,विनोद शर्मा,विजय शर्मा,श्यामजी दुबे, मोहित शर्मा,ओम जी तिवारी, अंशु तिवारी आदि ने आरती उतार व्यवस्था की देखभाल में जुटे रहे।कमेटी की तरफ से पात्र कलाकारों को सम्मानित किया गया।
